Saturday, October 31, 2009

मौत का डर देखा मैंने अपने बेटे के चेहरे पर...!!!

बात कल शाम की है जब आज तक पर एक programme दिखाया जा रहा था – पाताल के देवता (ऐसा ही कुछ था ) / उस programame में जो एक बात मेरे बच्चे को रुला गई वो थी कि उस गुफा में स्थित एक पत्थर का खम्बा जब ऊपर के चट्टान से मिल जाएगा तो ये दुनिया ख़त्म हो जायेगी / कुछ भी नहीं बचेगा / महा प्रलय आएगा /programme के ख़त्म होते ही बेटे ने पूछा मुझसे - "प्रलय क्या होता है ?" मैंने कहा जब सब ख़त्म हो जाता है तो उसे प्रलय कहते हैं और जब पूरी पृथ्वी नस्ट हो जायेगी तो वो महा प्रलय होगा / इतना सुनते ही उसकी आँखें डबडबा गयीं / उसने  पूछा कि क्या सही में कुछ भी नहीं बचेगा ? मैंने कहा नहीं / इतना सुनते ही वो चुप हो गया ; नथुने फूलने लगे / मुझे लगा कि उसे ये बात गहराई से झू गई है / उसके मानसिक हलचल यहीं छोड़ देना अच्छा नहीं होगा / मैंने कहा कि बेटा जो भी पैदा होता है उसे एक न एक दिन तो मरना ही होता है ! मेरी इस बात से न जाने उसके दिमाग में क्या हुआ होगा और उसने क्या -क्या सोचना शुरू कर दिया होगा , मैं कह नहीं सकता / मैं मुस्कुराया तो वो और गंभीर हो गया / मैंने कहा कि देखो दादाजी भी नहीं हैं …………तुम्हारे छोटे नाना कुछ दिनों पहले एक रोड एक्सीडेंट में ख़त्म हो गए …………इसी तरह तुम भी नहीं रहोगे , पापा भी नहीं रहेगा और माँ भी / इतना सुनना था कि आंखों में रुके आंसू चेहरे पर उतर गए …../ मैंने कहा रो मत बेटा / ये सब तो भगवन करते हैं …../ उसने पुछा कि क्या सच में वो खम्बा चट्टान से सट जाएगा और फिर सब मर जायेंगे ? मैंने कहा नहीं ! हम नहीं मरते …..आत्मा मरती है / मेरे इस कथन से वो भावनात्मक स्थिति से बाहर आ गया और सोचने लगा कि अभी तो पापा ने कहा कि सब मर जायेंगे और अभी कह रहे हैं कि हम नहीं मरेंगे / उसकी इस परेशानी को मैं भाप गया और उसे एक किस्सा बताया / मैंने कहा कि याद है न तुम्हें जब हम लोग किराये के मकान में रहते थे / हमें हर 11 महीनो के बाद घर बदलना पड़ता था ! जिस तरह हमारे घर का एक तय समय होता था उसी तरह हमारे शरीर का भी एक तय समय होता है और उसके बाद भगवान् कहते हैं कि अब इस शरीर को छोड़ दो / तो जिस तरह हम घर बदलते थे वैसे ही हमारी आत्मा शरीर बदलती है / दूसरे जन्म में कौन सा शरीर मिलता है वो भगवान् ही सोचते हैं / तो जब ये दुनिया ख़त्म हो जायेगी तो कलयुग का अंत होगा और उसके बाद आएगा सतयुग / उस युग में हम फिर पैदा होंगे / जब उसे इस बात की तसल्ली हुई कि हम पूरी तरह से नहीं ख़त्म होंगे तब उसने आंसू पोछ लिए अपने / मैंने कहा कि हम सब उस भगवन का ही हिस्सा हैं / जिस तरह सिनेमा हॉल में एक रौशनी जब परदे पर पड़ती है तो हमें लोग दिखते हैं , उसी तरह हम सब भी उस भगवन का हिस्सा हैं / रौशनी ख़त्म तो सब ख़त्म / सब कुछ उस किरण में मिल जाता है / उसी तरह जब सब ख़त्म हो जाएगा तो हम सब भगवन के पास चले जायेंगे /
क्या समझा होगा वो ये मैं अभी तो नहीं बता सकता लेकिन उसके दिमाग में ये बात उसे जीवन की सच्चाई के करीब ज़रूर ले आयी होगी /

Wednesday, October 28, 2009

Celibrity makes a product a BRAND, sometimes negatively.

कल Tv 9 पर एक आधे घंटे का programme देखा / सोच में पड़ गया की हमारी कितनी बड़ी ज़िम्मेदारी बन जाती है जब हम मनोरंजन के छेत्र में काम करते हुए समाज के जिम्मेदार नागरिक में शुमार हो जाते हैं ? इसका सीधा असर उन आम आदमी पर पड़ता है जो आपकी तरफ़ ऐसे देखता है जैसे की आपका हर कदम सोचा समझा होगा, समाज के हित में होगा / तब्बस्सुम जी का डॉ. मुनीर खान, जिसका क्लीनिक, कहीं वेर्सोवा में है, का show anchor करना कितने ही गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की जेब में सेंध लगा गया मालूम नहीं / ये शख्स दावा करता है कि इसके द्वारा दी गई दवा हर बिमारी का इलाज है / इस दावे को जब तबस्सुम जैसे जाने पहचाने चेहरे का समर्थन एक anchor के रूप में मिलता है तो एक आम आदमी यही सोचता है कि अगर तबस्सुम जी ने ये कहा है तो झूठ तो हो ही नहीं सकता / और इसी चक्कर में पड़ कर वो अपना नुक्सान कर बैठता है / हम- आप जब समय के साथ एक public figure बन जाते हैं तो इस बात का ख़याल रखना चाहिए कि हम क्या कर रहे हैं / कम से कम वैसी चीज़ों को समर्थन न दें जिसका सीधा सम्बन्ध जीवन से हो / तब्बस्सुमजी, मैं इस लेख के जरिये चाहूंगा कि आप उन्हीं news channel वालों का सहारा लेकर अपनी बात सामने रखें और आम आदमी को बताएं कि सच्चाई क्या है /