बात कल शाम की है जब आज तक पर एक programme दिखाया जा रहा था – पाताल के देवता (ऐसा ही कुछ था ) / उस programame में जो एक बात मेरे बच्चे को रुला गई वो थी कि उस गुफा में स्थित एक पत्थर का खम्बा जब ऊपर के चट्टान से मिल जाएगा तो ये दुनिया ख़त्म हो जायेगी / कुछ भी नहीं बचेगा / महा प्रलय आएगा /programme के ख़त्म होते ही बेटे ने पुझा महा प्रलय क्या होता है ? मैंने कहा जब सब ख़त्म हो जाता है तो उसे प्रलय कहते हैं और जब पूरी पृथ्वी नस्ट हो जायेगी तो वो महा प्रलय होगा / इतना सुनते ही उसकी आँखें डबडबा गयीं / उसने पुछा कि क्या सही में कुछ भी नहीं बचेगा ? मैंने कहा नहीं / इतना सुनते ही वो चुप हो गया ; नथुने फूलने लगे / मुझे लगा कि उसे ये बात गहराई से झू गई है / उसके मानसिक हलचल यहीं छोड़ देना अच्छा नहीं होगा / मैंने कहा कि बेटा जो भी पैदा होता है उसे एक न एक दिन तो मरना ही होता है ! मेरी इस बात से न जाने उसके दिमाग में क्या हुआ होगा और उसने क्या -क्या सोचना शुरू कर दिया होगा , मैं कह नहीं सकता / मैं मुस्कुराया तो वो और गंभीर हो गया / मैंने कहा कि देखो दादाजी भी नहीं हैं …………तुम्हारे छोटे नाना कुछ दिनों पहले एक रोड एक्सीडेंट में ख़त्म हो गए …………इसी तरह तुम भी नहीं रहोगे , पापा भी नहीं रहेगा और माँ भी / इतना सुनना था कि आंखों में रुके आंसू चेहरे पर उतर गए …../ मैंने कहा रो मत बेटा / ये सब तो भगवन करते हैं …../ उसने पुछा कि क्या सच में वो खम्बा चट्टान से सैट जाएगा और फिर सब मर जायेंगे ? मैंने कहा नहीं ! हम नहीं मरते …..आत्मा मरती है / मेरे इस कथन से वो भावनात्मक स्थिति से बाहर आ गया और सोचने लगा कि अभी तो पापा ने कहा कि सब मर जायेंगे और अभी कह रहे हैं कि हम नहीं मरेंगे / उसकी इस परेशानी को मैं भाप गया और उसे एक किस्सा बताया / मैंने कहा की याद है न तुम्हें जब हम लोग किराये के मकान में रहते थे / हमें हर 11 महीनो के बाद घर बदलना पड़ता था ! जिस तरह हमारे घर का एक तय समय होता था उसी तरह हमारे शरीर का भी एक तय समय होता है और उसके बाद भगवान् कहते हैं की अब इस शरीर को छोड़ दो / तो जिस तरह हम घर बदलते थे वैसे ही हमारी आत्मा शरीर बदलती है / दूसरे जन्म में कौन सा शरीर मिलता है वो भगवान् ही सोचते हैं / तो जब ये दुनिया ख़त्म हो जायेगी तो कलयुग का अंत होगा और उसके बाद आएगा सैटयुग / उस युग में हम फिर पैदा होंगे / जब उसे इस बात की तसल्ली हुई की हम पूरी तरह से नहीं ख़त्म होंगे तब उसने आंसू पोझ लिए अपने / मैंने कहा की हम सब उस भगवन का ही हिस्सा हैं / जिस तरह सिनेमा हॉल में एक रौशनी जब परदे पर पड़ती है तो हमें लोग दीखते हैं , उसी तरह हम सब भी उस भगवन का हिस्सा हैं / रौशनी ख़त्म तो सब ख़त्म / सब कुछ उस किरण में मिल जाता है / उसी तरह जब सब ख़त्म हो जाएगा तो हम सब भगवन के पास चले जायेंगे /
क्या समझा होगा वो ये मैं अभी तो नहीं बता सकता लेकिन उसके दिमाग में ये बात उसे जीवन की सच्चाई के करीब ज़रूर ले आया होगा /
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